रचनात्मक अर्थव्यवस्था (क्रिएटिव इकोनॉमी) को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने के उद्देश्य से दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय आयोजन ‘BRICS WAVES Bazaar’ का बुधवार को मुंबई में भव्य शुभारंभ हुआ। इस आयोजन में ब्रिक्स (BRICS) सदस्य और इसके साझेदार देशों के 500 से अधिक प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। इसका मुख्य उद्देश्य फिल्म, टेलीविजन, एनीमेशन, VFX, गेमिंग, संगीत और डिजिटल मीडिया जैसे उभरते क्षेत्रों में वैश्विक सहयोग को मजबूत करना है। इस सम्मेलन में विभिन्न देशों के सरकारी प्रतिनिधि, फिल्म निर्माता, कंटेंट क्रिएटर, निवेशक, OTT प्लेटफॉर्म, स्टार्टअप और तकनीकी विशेषज्ञ एक साथ जुटे हैं।
महाराष्ट्र सरकार के आईटी, एआई एवं संस्कृति मंत्री अधिवक्ता आशीष शेलार ने उद्घाटन समारोह में कहा कि मुंबई भारत की रचनात्मक अर्थव्यवस्था का केंद्र है और यह आयोजन वैश्विक स्तर पर इसका भविष्य तय करने वाला एक उच्चस्तरीय मंच साबित होगा। उन्होंने ‘ऑरेंज इकोनॉमी’ (संस्कृति, रचनात्मकता और व्यापार के संगम) को भारत के विकास की महत्वपूर्ण कुंजी बताया।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव चंचल कुमार ने बताया कि ब्रिक्स देशों के पास प्रतिभा, कहानियों और तकनीक का विशाल आधार है। उन्होंने कहा कि यह मंच नए व्यावसायिक अवसरों, सह-निर्माण (को-प्रोडक्शन) और निवेश को जन्म देगा। साथ ही, उन्होंने प्रतिनिधियों को नवंबर 2026 में होने वाले BRICS फिल्म फेस्टिवल और 2027 के WAVES संस्करण में भाग लेने का निमंत्रण भी दिया।
अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (IFFI) के निदेशक आशुतोष गोवारिकर ने सभी प्रतिनिधियों को IFFI 2026 के लिए आमंत्रित किया, जहाँ 8 विशेष श्रेणियों में लगभग 250 फिल्में प्रदर्शित की जाएंगी। विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव राजीव बोडवाडे ने रचनात्मक अर्थव्यवस्था के वैश्विक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह वैश्विक GDP में 3.1% का योगदान देती है और ब्रिक्स देशों के पास इसमें अपार संभावनाएं हैं।
NFDC के प्रबंध निदेशक प्रकाश मगदूम और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के संयुक्त सचिव सेंथिल राजन के अनुसार, इस दो दिवसीय आयोजन में B2B बैठकों, डिजिटल परिवर्तन, बौद्धिक संपदा अधिकार और महिला उद्यमिता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की जाएगी, जिससे ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार और सांस्कृतिक सहयोग को एक नया आयाम मिलेगा।
